5+ Hindi Short Story || Moral Hindi Story

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हे हमारे ब्लॉग पर आज हम आपके साथ कुछ हिंदी कहानिया शेयर करने वाले हे और आशा करते हे की आपको ये Hindi Short Story बहुत पसंद आएंगे, अगर पसंद आये तो सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करन..
5+ Hindi Short Story || Moral Hindi Story
5+ Hindi Short Story || Moral Hindi Story 


नन्हीं चिड़िया – Child Story in Hindi


बहुत समय पुरानी बात है, एक बहुत घना जंगल हुआ करता था| एक बार किन्हीं कारणों से पूरे जंगल में भीषण आग लग गयी| सभी जानवर देख के डर रहे थे की अब क्या होगा??


थोड़ी ही देर में जंगल में भगदड़ मच गयी सभी जानवर इधर से उधर भाग रहे थे पूरा जंगल अपनी अपनी जान बचाने में लगा हुआ था| उस जंगल में एक नन्हीं चिड़िया रहा करती थी उसने देखा क़ि सभी लोग भयभीत हैं जंगल में आग लगी है मुझे लोगों की मदद करनी चाहिए|
यही सोचकर वह जल्दी ही पास की नदी में गयी और चोच में पानी भरकर लाई और आग में डालने लगी| वह बार बार नदी में जाती और चोच में पानी डालती| पास से ही एक उल्लू गुजर रहा था उसने चिड़िया की इस हरकत को देखा और मन ही मन सोचने लगा बोला क़ि ये चिड़िया कितनी मूर्ख है इतनी भीषण आग को ये चोंच में पानी भरकर कैसे बुझा सकती है|
यही सोचकर वह चिड़िया के पास गया और बोला कि तुम मूर्ख हो इस तरह से आग नहीं बुझाई जा सकती है|
चिड़िया ने बहुत विनम्रता के साथ उत्तर दिया-“मुझे पता है कि मेरे इस प्रयास से कुछ नहीं होगा लेकिन मुझे अपनी तरफ से best करना है, आग कितनी भी भयंकर हो लेकिन मैं अपना प्रयास नहीं छोड़ूँगी”
उल्लू यह सुनकर बहुत प्रभावित हुआ|
तो मित्रों यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है| जब कोई परेशानी आती है तो इंसान घबराकर हार मान लेता है लेकिन हमें बिना डरे प्रयास करते रहना चाहिए यही इस कहानी की शिक्षा है|

दो मुंह वाली चिड़िया – Animal Story in Hindi


नंदन वन में एक नन्हीं चिड़िया रहती थी जिसके दो मुँह थे। दो मुँह होने के कारण वह चिड़िया दूसरे पछियों से बिल्कुल विचित्र दिखती थी। वह चिड़िया एक बरगद के पेड़ पर घौंसला बना कर रहती थी।
एक दिन वह चिड़िया जंगल में भोजन की तलाश में इधर उधर उड़ रही थी। अचानक चिड़िया के दायें वाले मुँह की नजर एक लाल फल पर पड़ी। देखते ही उसके मुँह में पानी आ गया और वह तेजी से वो लाल फल खाने को आगे बढ़ी।
अब चिड़िया का दायाँ मुँह बड़े स्वाद से वो फल खा रहा था। बायाँ मुँह बेचारा बार बार दाएं मुंह की तरफ देख रहा था कि ये मुझे भी खाने को दे लेकिन दायाँ वाला चुपचाप मस्ती से फल खाये जा रहा था।
अब बाएँ मुँह ने दाएँ वाले से प्रार्थना की, कि थोड़ा सा फल खाने को मुझे भी दे दो तो इसपर दाएं मुंह ने गुस्सा दिखाते हुए कहा – कि हम दोनों का पेट एक ही है। अगर मैं खाऊँगा तो वो हमारे पेट में ही जायेगा। लेकिन उसने बाएं वाले को कुछ खाने को नहीं दिया।
अगले दिन चिड़िया फिर से जंगल में खाने की तलाश में उड़ रही थी। तभी बाएं मुँह की नजर एक अदभुत फल पर पड़ी जो बहुत चमकीला था। वह तेजी से उस फल की तरफ लपका। अब जैसे ही वो फल खाने को हुआ तुरंत पास बैठे एक कौए ने चेतावनी दी कि इस फल को मत खाओ ये बहुत जहरीला है।
ये सुनकर दायाँ मुंह भी चौंका और बाएं से प्रार्थना की कि इस फल को मत खाओ ये हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित होगा लेकिन बाएं मुंह को तो दाएं से बदला लेना था।
उसने एक ना सुनी और चुपचाप वह फल खाने लगा। कुछ ही देर में चिड़िया का शरीर मृत होकर जमीन पर गिर पड़ा।
दोस्तों कहानी सुनने में तो आनंद आया होगा लेकिन जब मैं आपको इसकी शिक्षा बताऊंगा तो आपकी आँखे फटी रह जाएँगी। आजकल के माहौल में देखा जाता है कि एक ही परिवार के लोग एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं, एक दूसरे से दुश्मनी रखते हैं। लेकिन जब भी वह एक दूसरे को नुकसान पहुँचाने का सोचते हैं या एक दूसरे से बदला लेने का सोचते हैं तो नुकसान पूरे परिवार का ही होता है। इसलिए एक दूसरे से मिल जुल कर रहें क्योंकि अगर परिवार का एक भी सदस्य गलत काम करे तो नुकसान पूरे परिवार का होता है। यही इस कहानी की शिक्षा है। धन्यवाद!!!!!

जीतने का मतलब


एक गांव में मोहन नाम का लड़का रहता था| उसके पिताजी एक मामूली मजदूर थे| एक दिन मोहन के पिताजी उसको अपने साथ शहर ले गए| उनको एक मैदान साफ करने का काम मिला था जिसमें एक दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना था|
मोहन मैदान देख कर बहुत खुश हुआ| उस दिन उसे भी दौड़ने का शौक चढ़ गया| जब यह दोनों गांव लौटे तो मोहन ने अपने पिता से जिद की कि हमारे गांव में भी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना चाहिए| मोहन के पिता ने गांव के प्रधान के सामने यह सुझाव रखा|
कुछ ही दिनों में प्रतियोगिता की तैयारी शुरू हो गई और आसपास के सभी गांव के बहुत सारे बच्चे दौड़ में हिस्सा लेने के लिए आ गए|
मोहन के दादा जी सब शांति से देख रहे थे| हालांकि प्रतियोगिता बहुत कठिन थी| लेकिन मोहन ने ठान रखा था कि उसे जीतना ही है|सीटी बजते ही सारे प्रतिभागी रेस लाइन की तरफ दौड़ने लगे|
कड़क धूप और पथरीले रास्ते को पार करते हुए मोहन ने रेस जीत ली| पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा| मोहन की एक के बाद एक जीत का सिलसिला शुरू हो गया|
मोहन के दादा जी मन ही मन यह देख कर बहुत दुखी होते थे| एक दिन दादाजी ने मोहन के लिए एक खास दौड़ का आयोजन किया| दौड़ के नाम पर मोहन खुशी-खुशी मैदान में आया|
कड़क धूप और पथरीले रास्ते को पार करते हुए मोहन ने रेस जीत ली| पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा| मोहन की एक के बाद एक जीत का सिलसिला शुरू हो गया|
मोहन के दादा जी मन ही मन यह देख कर बहुत दुखी होते थे| एक दिन दादाजी ने मोहन के लिए एक खास दौड़ का आयोजन किया| दौड़ के नाम पर मोहन खुशी-खुशी मैदान में आया|

बेवकूफ गधा – A Donkey story


जंगल में एक गधा रहता था औरवह शेर का बहुत अच्छा मित्र था| शेर हर रोज एक जानवर को खा जाता था लेकिन क्योंकि गधा उसका दोस्त था इसलिए शेर उसकी तरफ कभी भी नहीं देखता था|
लोमड़ी को यह बात हजम नहीं होती थी| एक दिन जब गधा एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था तो लोमड़ी और खरगोश पेड़ के पीछे जाकर बात करने लगे|
अब गधे से रहा नहीं गया| गधा  उनकी बातें सुनने लगा| लोमड़ी बोली, पता है, गधा अभी तक कुंवारा क्यों हैं?
क्योंकि जो भी गधी जंगल में आती है शेर उसे खा जाता है|
गधे को इस बात से बड़ी ठेस पहुंची| लोमड़ी की वजह से गधे और शेर के बीच में दरार आ गई थी| एक दिन जब शेर अपने शिकार पर निकला तो गधा उससे जाकर बैठ गया और बोला मैं तुम्हें शिकार नहीं करने दूंगा |शेर ने उसे बहुत समझाया लेकिन गधा नहीं समझा|आखिरकार बेचारा गधा  शेर का शिकार बन गया|
बॉस हंसते हुए बोले, देखो विकास, लोमड़ी हर जगह मिलेगी, जो तुम्हारे काम को, तुम्हारे रिश्ते को खराब करने की कोशिश करेगी| यह तुम्हें तय करना है कि तुम क्या करोगे|

सीख:- किसी की बात पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए| पहले उसे परखना जरूरी है 



मेंढक और लड़के


एक दिन कुछ लड़के एक तालाब के पास खेल रहे थे| उस तालाब में मेंढको का एक परिवार रहता था| लड़कों ने अपने मजे के लिए तालाब में
पत्थर फेंकने शुरू कर दिए| और जब पानी उछलता था, तो वह लड़के भी खुशी से उछलने लगते थे| जैसे ही पत्थर पानी में जाता था, तो बेचारे
मेंढक दर्द की वजह से कांपने लगते थे| अंत में एक साथी मेंढक बाहर आया और उसने प्रार्थना की| ‘बच्चों ऐसा खतरनाक खेल मत खेलो’|
जिससे तुम्हें आनंद का अनुभव हो रहा है, वही खेल हमारे लिए दुखदाई मृत्यु का कारण बन रहा है|

सीख:- हमें दूसरों के जीवन से खिलवाड़ करके अपना मनोरंजन नहीं करना चाहिए|”



कौवा और अबाबील


एक बार एक अबाबील और कौए के बीच उनके पंखों की सुंदरता को लेकर बहस हो गई| अबाबील ने कौवे से घमंड से कहा कि ” मेरे चमकदार
पंखों को देखो| यह कितने खूबसूरत हैं| और जरा अपने काले, बेढंगे पंखों को देखो| यह कितने बुरे पंख हैं| मेरे लिए जीवन में खूबसूरती ही सब
कुछ है|” यह सुनकर कौआ मुस्कुराया और उसने अबाबील से कहा, “तुम खूबसूरत हो सकते हो, लेकिन तुम्हारी खूबसूरती केवल बसंत ऋतु
में ही रहती है| तुम तो गर्मी बर्दाश्त ही नहीं कर पाते हो| जबकि मुझे देखो, मेरे पंख मुझे ठंड और गर्मी दोनों से बचाते हैं|”

सीख:- सुख के साथी, सच्चे साथी नहीं होते हैं|